हरियाणा सरकार ने 370 ‘भ्रष्ट’ पटवारियों की पहचान की, 170 बिचौलियों पर कार्रवाई का आदेश
हरियाणा सरकार ने राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए 370 भ्रष्ट पटवारियों की पहचान की है। यह पहला मौका है जब सरकार ने इतने बड़े पैमाने पर राजस्व विभाग में सुधार लाने की दिशा में कदम उठाया है। इन पटवारियों पर कार्रवाई के लिए संबंधित उपायुक्तों को 15 दिनों के अंदर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
भ्रष्टाचार की समस्या क्यों गंभीर है?
पटवारियों का काम जमीन के रिकॉर्ड को संभालना, म्यूटेशन करना और फरद जारी करना होता है। आम जनता के लिए यह एक आवश्यक प्रक्रिया है। लेकिन, इन कार्यों में भ्रष्टाचार आम हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, पटवारियों द्वारा लोगों को जानबूझकर परेशान किया जाता है, जिससे वे रिश्वत देने के लिए मजबूर हो जाते हैं। यह न केवल जनता के लिए असुविधा पैदा करता है बल्कि सरकार की छवि को भी खराब करता है।
जिलावार आंकड़ों की विस्तृत जानकारी
370 पटवारियों में से अधिकांश की पहचान कैथल जिले में की गई है, जहां 46 पटवारी भ्रष्ट पाए गए। अन्य जिलों में स्थिति इस प्रकार है:
- सोनीपत: 41 पटवारी
- महेंद्रगढ़: 36 पटवारी
- गुरुग्राम: 27 पटवारी
- फतेहाबाद: 25 पटवारी
- कुरुक्षेत्र: 23 पटवारी
- झज्जर: 20 पटवारी
- पलवल: 17 पटवारी
- रेवाड़ी: 16 पटवारी
- यमुनानगर: 14 पटवारी
- सिरसा, हिसार, हांसी: 13-13 पटवारी
- भिवानी: 10 पटवारी
- पंचकूला: 0 (यहां कोई भ्रष्ट पटवारी नहीं मिला)
बिचौलियों की संलिप्तता
राज्य सरकार ने 170 बिचौलियों की भी पहचान की है, जो पटवारियों के लिए रिश्वत वसूलने का काम करते हैं। इनमें गुरुग्राम में सबसे ज्यादा 26 बिचौलिये हैं। महेंद्रगढ़ में 20, सोनीपत, पलवल और रेवाड़ी में 15-15, और यमुनानगर में 14 बिचौलिये शामिल हैं।
भ्रष्टाचार का तरीका
रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे पटवारी और बिचौलिये मिलकर जनता को परेशान करते हैं।
- गुरुग्राम: जमीन म्यूटेशन के लिए 4,000 से 5,000 रुपये तक की रिश्वत ली जाती है। फरद जारी करने के लिए 200 से 500 रुपये मांगे जाते हैं।
- चर्खी दादरी: म्यूटेशन के लिए 1,000 से 2,000 रुपये वसूले जाते हैं।
- फरीदाबाद: पुराने दस्तावेज खोजने के लिए 500 से 700 रुपये तक मांगे जाते हैं।
अंबाला जिले में भी कई पटवारियों पर आरोप हैं कि वे बिचौलियों के जरिए जनता से रिश्वत लेते हैं। कुछ पटवारी तो पिछले कई वर्षों से एक ही जगह तैनात हैं और भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल हैं।
सरकार की कार्रवाई का आदेश
अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) अनुराग रस्तोगी ने कहा कि भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। उपायुक्तों को 15 दिनों के भीतर इन पटवारियों पर कार्रवाई कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जनता को बिना रिश्वत दिए अपने काम पूरे करने की सुविधा मिले।
नई नियुक्तियों से उम्मीद
हरियाणा में वर्तमान में 1,378 पटवारी पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 1,313 पद खाली हैं। सरकार ने हाल ही में 2,600 नए पटवारियों की भर्ती की है। ये नए पटवारी प्रशिक्षण पूरा करने के बाद जल्द ही अपनी जिम्मेदारियां संभालेंगे। इससे राजस्व विभाग में कर्मचारियों की कमी दूर होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
भविष्य की उम्मीद
इस ऐतिहासिक कदम से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि जनता का विश्वास भी सरकार पर मजबूत होगा। पारदर्शिता लाने के लिए सरकार की यह पहल हरियाणा में प्रशासनिक सुधार का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है।
