बीबीएमपी में बेटे ने संभाला मां का सरकारी काम, लोकायुक्त की छापेमारी में बड़े खुलासे

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शुक्रवार शाम को लोकायुक्त टीमों ने बीबीएमपी (ब्रुहट बेंगलुरु महानगर पालिके) के कार्यालयों में औचक निरीक्षण किया, जिससे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। उप लोकायुक्त जस्टिस बी वीरप्पा ने पाया कि एक कर्मचारी की गैरमौजूदगी में उनका बेटा उनके स्थान पर काम कर रहा था।

जांच के दौरान, जस्टिस वीरप्पा ने पाया कि काव्या, जो दक्षिण एंड सर्कल में सहायक राजस्व अधिकारी (एआरओ) के कार्यालय में द्वितीय श्रेणी सहायक के पद पर तैनात हैं, की अनुपस्थिति में उनका बेटा नवीन उनके स्थान पर काम कर रहा था। नवीन ने खुलकर स्वीकार किया कि वह अपनी मां की जगह सार्वजनिक असुविधा से बचने के लिए काम कर रहा था।

जस्टिस वीरप्पा ने इस घटना को “बीबीएमपी कार्यालयों की दुर्दशा” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि नवीन को उसकी मां का लॉगिन आईडी और पासवर्ड तक उपलब्ध था, जिसकी मदद से वह सरकारी कार्यों को अंजाम दे रहा था। इसके अलावा, सहायक राजस्व अधिकारी सुजाता ने कार्यालय में काम करने के लिए 10,000 रुपये मासिक पर एक अनधिकृत व्यक्ति को भी नियुक्त किया था।

लोकायुक्त अधिकारियों ने सिद्धपुरा पुलिस स्टेशन में इस मामले पर शिकायत दर्ज करवाई, जिसमें नवीन समेत सभी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य आरोप लगाए गए।

व्यापक औचक निरीक्षण

लोकायुक्त जस्टिस बीएस पाटिल, उप लोकायुक्त जस्टिस केएन फणींद्र और बी वीरप्पा के नेतृत्व में न्यायिक और पुलिस अधिकारियों की टीम ने बीबीएमपी के आठ क्षेत्रों में 54 कार्यालयों का निरीक्षण किया। ये निरीक्षण भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ कार्यवाही में ढिलाई की शिकायतों पर आधारित थे।

जस्टिस फणींद्र ने चामराजपेट, वसंतनगर और शिवाजीनगर के सहायक राजस्व कार्यालयों में अधिकारियों की लापरवाही और जवाबदेही की कमी के लिए उन्हें फटकार लगाई। वहीं, जस्टिस पाटिल ने हेब्बल उप-डिवीजन के एआरओ कार्यालयों का दौरा किया, जहां उपस्थिति पंजी में 21 कर्मचारियों का उल्लेख था, लेकिन मौके पर केवल तीन कर्मचारी मौजूद पाए गए।

आगे की कार्यवाही

लोकायुक्त ने बीबीएमपी के प्रमुख तुषार गिरीनाथ को तलब करने की बात कही है। इन निरीक्षणों के बाद बीबीएमपी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए सख्त कदम उठाए जाने की संभावना है।

निष्कर्ष:
यह घटना बीबीएमपी कार्यालयों में प्रशासनिक अनियमितताओं और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है। लोकायुक्त के इस कड़े कदम से उम्मीद है कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर लगाम लगेगी।

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