15 जनवरी 2025 की शाम छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। टीम ने बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) गजानंद कडू और सहायक ग्रेड 3 बाबू पुनाराम कड़वेकर को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने किसान से स्थायी बिजली कनेक्शन के नाम पर 6 हजार रुपए की घूस मांगी थी।
शिकायत और कार्रवाई की पृष्ठभूमि
मोहखेड़ चौकी निवासी किसान जगदेव डोंगरे ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने खेत में बोरवेल करवाया था और 5 एचपी पंप कनेक्शन के लिए दिसंबर 2024 में विद्युत वितरण केंद्र उमरानाला में आवेदन जमा किया था। हालांकि, जेई गजानंद कडू ने स्थायी कनेक्शन देने के बजाय बिजली चोरी का मामला बनाते हुए किसान पर 30 हजार रुपए की पेनल्टी लगा दी।
इसके बाद जेई ने स्थायी कनेक्शन के लिए 10 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की। किसान के निवेदन और मोलभाव के बाद यह रिश्वत 6 हजार रुपए पर तय हुई।
लोकायुक्त की कार्रवाई
किसान जगदेव ने जेई और बाबू की इस घूसखोरी की शिकायत जबलपुर लोकायुक्त एसपी से की। जांच में आरोप सही पाए गए। लोकायुक्त टीम ने योजना बनाकर दोनों भ्रष्ट अधिकारियों को रंगे हाथ पकड़ने का निर्णय लिया।
15 जनवरी को जैसे ही किसान रिश्वत की रकम लेकर उमरानाला स्थित विद्युत वितरण केंद्र पहुंचा, लोकायुक्त की टीम ने छापा मार दिया। गजानंद कडू और पुनाराम कड़वेकर को 6 हजार रुपए की घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
किसान की आवाज बनी लोकायुक्त
किसान जगदेव डोंगरे का कहना है कि वह अपनी मेहनत से फसल उगाते हैं और बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार ने उन्हें बेहद परेशान किया। उन्होंने लोकायुक्त की टीम को धन्यवाद दिया और कहा कि अगर समय रहते यह कार्रवाई न होती, तो कई अन्य किसानों को भी इसी तरह परेशान किया जाता।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्ती
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए लोकायुक्त लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। बीते महीनों में कई सरकारी अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है। यह घटना भी साबित करती है कि लोकायुक्त टीम अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही है और भ्रष्टाचारियों पर शिकंजा कस रही है।
विद्युत विभाग पर सवाल
यह मामला न केवल व्यक्तिगत अधिकारियों की बेईमानी को उजागर करता है, बल्कि पूरे विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है। किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के बजाय उन्हें रिश्वतखोरी और झूठे मामलों में फंसाना एक गंभीर समस्या है।
लोकायुक्त की पहल और भविष्य की उम्मीद
इस घटना के बाद छिंदवाड़ा में अन्य विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने आम जनता में यह विश्वास जगाया है कि भ्रष्टाचारियों को उनके अपराध की सजा जरूर मिलेगी।
भ्रष्टाचार जैसे मामलों में लोकायुक्त की ऐसी कार्रवाइयां प्रशासनिक तंत्र को सुधारने और जनता में जागरूकता फैलाने का काम करती हैं। उम्मीद है कि यह कदम अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारियों को भी ईमानदारी के साथ काम करने के लिए प्रेरित करेगा।
निष्कर्ष
भ्रष्टाचार किसी भी समाज की प्रगति में बड़ी बाधा है। किसान जैसे मेहनतकश लोग जब रिश्वत जैसी समस्या का सामना करते हैं, तो उनका हक छीना जाता है। लोकायुक्त की यह कार्रवाई न केवल एक बड़ी सफलता है, बल्कि यह संदेश भी है कि न्याय और ईमानदारी को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसी घटनाओं से आम जनता को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उचित कदम उठाने का हौसला मिलता है।
