MP में 20000 से अधिक शिक्षक मुफ्त का ले रहे वेतन, कई दफ्तरों में कर रहे बाबूगीरी

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मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग में चल रही अटैचमेंट की प्रक्रिया ने शिक्षा व्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया है। राज्य में लगभग 20,000 शिक्षक मुफ्त में वेतन ले रहे हैं, लेकिन वे स्कूलों में पढ़ाने के बजाय दफ्तरों में बाबूगिरी कर रहे हैं। यह स्थिति शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है और विद्यार्थियों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।

नवसाक्षरता के नाम पर शिक्षकों का अटैचमेंट

राज्य में नवसाक्षरता के नाम पर 5,000 से अधिक शिक्षक विभिन्न कार्यक्रमों में अटैच हैं। भोपाल जिले में लगभग 70 शिक्षक नवसाक्षरता कार्यक्रम में सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि, इन शिक्षकों को यह कार्य स्कूलों में पढ़ाई के साथ करना चाहिए, लेकिन वास्तविकता में ऐसा नहीं हो रहा है। इसका परिणाम यह है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो रही है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है। यह समस्या उन ग्रामीण इलाकों में और भी गंभीर हो जाती है, जहां पहले से ही शिक्षकों की संख्या सीमित है।

मुख्यालयों और कार्यालयों में शिक्षकों की तैनाती

स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत माध्यमिक शिक्षा मंडल, लोक शिक्षण संचालनालय, राज्य शिक्षा केंद्र, और जिला शिक्षा कार्यालयों में कई शिक्षक अटैच हैं। इनमें से अधिकांश शिक्षक राजनीतिक या व्यक्तिगत जोड़-तोड़ के माध्यम से इन कार्यालयों में अपनी नियुक्ति करवा रहे हैं। यह स्थिति न केवल शिक्षा विभाग की नीतियों की कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि उन विद्यार्थियों के साथ भी अन्याय है जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के हकदार हैं।

शिक्षकों की कमी और दोहरी जिम्मेदारी

प्रदेश में कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं नजदीक हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को उचित मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने नजदीकी स्कूलों से शिक्षकों को बुलाकर सप्ताह में दो दिन पढ़ाने का निर्देश दिया है। हालांकि, यह कदम केवल अस्थायी समाधान है और शिक्षकों पर अतिरिक्त कार्यभार डालता है। इसका प्रभाव शिक्षकों की कार्यक्षमता और विद्यार्थियों की शिक्षा दोनों पर पड़ता है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव: रतलाम की घटना

रतलाम जिले में शिक्षकों की कमी और बढ़ते कार्यभार के कारण एक शिक्षिका की ब्रेन स्ट्रोक से मौत हो गई। इस घटना के बाद शिक्षकों ने प्रदर्शन कर अटैचमेंट को समाप्त करने की मांग की थी, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। रतलाम जिले में आज भी लगभग 70 शिक्षक नवसाक्षरता कार्यक्रम में और 30 शिक्षक कार्यालयों में तैनात हैं। यह घटना दर्शाती है कि कैसे अटैचमेंट प्रणाली शिक्षकों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।

आदेशों की अनदेखी

लोक शिक्षण आयुक्त शिल्पा गुप्ता ने विभिन्न आदेश जारी कर गैर-शैक्षणिक कार्यों में तैनात शिक्षकों को स्कूलों में वापस भेजने का निर्देश दिया था। शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार, शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाना चाहिए। इसके बावजूद, इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। इस लापरवाही का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है, जिनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है।

शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रभाव

अटैचमेंट के कारण सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित न्यूनतम सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। यह समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब विषय-विशेषज्ञ शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण विद्यार्थियों को उनकी कक्षाओं में सही मार्गदर्शन नहीं मिलता।

समाधान के सुझाव

  1. सख्त निगरानी और जवाबदेही: शिक्षकों के अटैचमेंट को समाप्त करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं और आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए जो इन आदेशों का पालन नहीं करते।
  2. शिक्षकों की नियुक्ति: शिक्षकों की वास्तविक आवश्यकता का आकलन कर नई नियुक्तियां की जाएं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जाए।
  3. डिजिटल समाधान: ऑनलाइन क्लास और डिजिटल शिक्षण सामग्री का उपयोग कर शिक्षकों की कमी को आंशिक रूप से दूर किया जा सकता है। यह उन क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है जहां शिक्षकों की भौतिक उपस्थिति सुनिश्चित करना कठिन है।
  4. शिक्षकों का पुनः प्रशिक्षण: शिक्षकों को उनके मूल कार्य यानी पढ़ाने के प्रति प्रेरित करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएं। इन कार्यक्रमों में शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों और नई शैक्षणिक पद्धतियों से परिचित कराया जाए।
  5. नवसाक्षरता कार्यक्रम की समीक्षा: इस कार्यक्रम की आवश्यकता और कार्यप्रणाली की समीक्षा कर इसे प्रभावी बनाया जाए। जिन शिक्षकों को इस कार्यक्रम के तहत अटैच किया गया है, उन्हें उनकी मूल जिम्मेदारियों पर लौटाया जाए।
  6. विभागीय सुधार: शिक्षा विभाग को अपनी नीतियों में सुधार करना चाहिए ताकि शिक्षकों की अटैचमेंट प्रक्रिया को रोका जा सके।

मध्यप्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। अटैचमेंट जैसी व्यवस्था को खत्म कर शिक्षकों को उनके मूल कार्य में लौटाना ही विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सही दिशा होगी।

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